वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा की जा रही तस्वीर की न तो विभाग द्वारा पुष्टि की गई है और न ही किसी स्थानीय निवासी ने तेंदुआ दिखाई देने की बात कही है। प्रारंभिक जांच में यह फोटो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से निर्मित प्रतीत हो रही है।

स्थानीय निवासी राहुल सिंह ने भी वायरल तस्वीर को भ्रामक करार दिया। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से फोटो बनाकर क्षेत्र में अनावश्यक डर और दहशत का माहौल तैयार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

इसी तरह, जिस मकान के पास तेंदुआ दिखने का दावा किया गया था, उसके भवन स्वामी ने भी बयान दिया कि वहां किसी ने तेंदुआ नहीं देखा और आसपास लगे किसी भी सीसीटीवी कैमरे में ऐसा कोई दृश्य रिकॉर्ड नहीं हुआ है।

वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव से जुड़ी वास्तविक जानकारी मिलने पर तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचित करने की बात कही गई है।