सरकार भले ही किसानों को लेकर तरह-तरह की योजनाएं चला रही है जिससे कि किसान समृद्ध बने और विकसित हो रहे देश में अपनी अहम भूमिका भी निभा सके लेकिन सरकार के नुमाइंदे सरकार और किसान दोनों की मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
जमीन का सीमांकन किए बिना ही बना दिया पुल
दरअसल रामपुर बघेलान तहसील अंतर्गत ग्राम महीदल मे रीवा और सतना जिले की सीमा में एक सेतु का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन जिस जमीन पर सेतु का निर्माण किया जा रहा है, उस जमीन का सीमांकन प्रशासन द्वारा नहीं किया गया जिसके चलते किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल जिस जगह पर सेतु निर्माण किया जा रहा है उक्त जमीन में नौ लोग पट्टेदार हैं और सरकार ने बाकायदा इन किसानों का मुआवजा भी तय कर दिया, लेकिन किसानों को यही नहीं मालूम कि उनकी कितनी जमीन अधिग्रहित की गई है।
लाडली बहनों के साथ ही किया जा रहा छलावा
ग्राम महीदल में जिस जमीन पर सेतु निर्माण किया जा रहा है उस जमीन मैं ज्यादातर लाडली बहने ही पट्टेदार है और इन लाडली बहनों द्वारा उक्त सेतु निर्माण का विरोध लगातार किया जाता रहा, लेकिन शासन और प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी और जबरन उनकी जमीन पर सेतु निर्माण का कार्य कराया जा रहा है।
आत्मदाह को हो रहे मजबूर
उक्त पुल के निर्माण में जब आज मौके पर प्रशासन की टीम जमीन का सीमांकन करने पहुंची तो किसानों ने विरोध जताना शुरू किया। गांव के रहने वाले किसान छेदीलाल पांडे ने बताया कि हमारी जमीन में जबरन पुल का निर्माण किया जा रहा है और रोड भी बनाया जा रहा है जिसके चलते अब हमारी जमीन खेती लायक नहीं बची। किसानों का कहना था कि अगर सरकार हमारी जायज मांगों को नहीं मानती तो अब हम आत्महत्या करने को मजबूर होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।






