रायपुर, छत्तीसगढ़। पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में प्रथम सतगुरु परम पूज्य संत शदाराम साहिब जी एवं अष्टम सतगुरु परम पूज्य संत गोविंदराम साहिब जी का अवतरण महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। वर्तमान पीठाधीश्वर संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सेवा गतिविधियों के माध्यम से मानवता और परोपकार का संदेश दिया जा रहा है।
धार्मिक अनुष्ठानों और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ दरबार
महोत्सव का शुभारंभ आशा दीवार, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता के सत्संग के साथ हुआ। इसके बाद संतों के गंगा स्नान, पंचामृत स्नान, पूजन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सार्वभौम दास जी महाराज और वृंदावन के प्रियावल्लभ जी ने सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। महाप्रसाद वितरण के दौरान सभी के सुख, शांति और कल्याण की कामना की गई।
सेवा कार्यों के जरिए दिया मानवता का संदेश
अवतरण महोत्सव के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सरोकारों को भी विशेष महत्व दिया गया। मेडिकल कैंप, रक्तदान, अन्न-वस्त्र वितरण, प्रसाद वितरण और भंडारे के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता का प्रयास किया गया। आयोजकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नगरों में स्थित शदाणी दरबारों में भी सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
इन आयोजनों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सेवा, सहयोग और परोपकार के लिए प्रेरित करना है, ताकि आध्यात्मिक आस्था के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत हो।

‘छत्तीसगढ़ स्टार नाइट’ में कलाकारों ने बांधा समां
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘छत्तीसगढ़ स्टार नाइट’ में भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में चंपा निषाद, प्रसन्ना राजेश अवस्थी, गरिमा जैन, चैतन्य देशमुख, ह्यूमन साहू, अमित चिमनानी और बलदेव चावला सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।

इस अवसर पर वृंदावन, काशी और अमरकंटक सहित विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाया। दिनभर प्रसाद वितरण, भंडारा तथा अन्न-वस्त्र वितरण के कार्यक्रम भी जारी रहे।
318 वर्ष पुरानी संत परंपरा की ऐतिहासिक विरासत
शदाणी दरबार की परंपरा तीन शताब्दियों से अधिक पुरानी मानी जाती है। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, प्रथम सतगुरु संत शदाराम साहिब जी ने सिंध क्षेत्र में इस संत परंपरा की नींव रखी थी। समय के साथ यह परंपरा आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानव सेवा के कार्यों के लिए विशिष्ट पहचान बनाती गई।

अष्टम सतगुरु संत गोविंदराम साहिब जी ने धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया। विभाजन के बाद सिंध, पाकिस्तान में स्थित धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं के बीच संपर्क बनाए रखने के प्रयास भी इस परंपरा की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा रहे हैं।
आस्था के साथ सेवा और मानव कल्याण का संदेश
रायपुर स्थित शदाणी दरबार आज देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। अवतरण महोत्सव के माध्यम से संत परंपरा की विरासत को स्मरण करने के साथ भक्ति, सद्भाव, परोपकार और मानव कल्याण का संदेश दिया जा रहा है।
महोत्सव का मूल भाव यही है कि आस्था के साथ सेवा, भक्ति के साथ परोपकार और संस्कृति के साथ मानव कल्याण ही संत परंपरा की वास्तविक पहचान है।






